लालबर्रा महाविद्यालय में भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती पर भव्य कार्यक्रम | जनजातीय गौरव दिवस 2025 का विशेष आयोजन
लालबर्रा, बालाघाट। संपादक – महेन्द्र धुर्वे
शासकीय महाविद्यालय लालबर्रा में भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती के समापन वर्ष के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस 2025 का आयोजन अत्यंत उत्साह एवं गरिमा के साथ 14 नवंबर को किया गया।
यह आयोजन प्राचार्य श्री सुमन बरवा के मार्गदर्शन में तथा
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भारतीय ज्ञान परंपरा इकाई,
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राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS)
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एवं स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ
के संयुक्त तत्वाधान में संपन्न हुआ।
यह कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि छात्रों को जनजातीय अस्मिता, संस्कृति, संघर्ष और वीरागाथा से भी परिचित कराता है।
⭐ कार्यक्रम का शुभारंभ: भारतीय परंपरा के साथ
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुरूप माँ सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन,
पूजन, अर्चन एवं माल्यार्पण के साथ की गई।
इस दौरान महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएँ तथा आयोजक इकाइयों के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
⭐ भगवान बिरसा मुण्डा: स्वतंत्रता संग्राम के जननायक
प्राचार्य श्री सुमन बरवा ने अपने प्रेरणादायक व्याख्यान में कहा कि—
“भगवान बिरसा मुण्डा भारतीय जनजातीय समाज के महानायक, स्वतंत्रता संग्राम के वीर योद्धा और सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक थे।”
उन्होंने विद्यार्थियों को बिरसा मुण्डा के जीवन के प्रमुख पहलुओं के बारे में बताया:
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1875 में झारखंड के उलीहातू में जन्म
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‘धरती आबा’ के रूप में प्रसिद्ध
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अंग्रेजों के खिलाफ उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व
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जनजातीय समाज में शिक्षा, संस्कृति और आत्मसम्मान का प्रसार
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सामाजिक कुरीतियों का विरोध एवं सुधार
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25 वर्ष की अल्पायु में ही महान क्रांति का नेतृत्व
उनका जीवन आज के युवाओं के लिए साहस, संघर्ष, नेतृत्व और देशभक्ति का प्रेरणास्रोत है।
⭐ 1–15 नवंबर तक आयोजित हुई विविध गतिविधियाँ
150वीं जयंती के समापन वर्ष को विशेष बनाने के लिए महाविद्यालय में 01 से 15 नवंबर 2025 तक विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक व शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
इन आयोजनों ने छात्रों की प्रतिभा, सृजनशीलता और ज्ञान को नई दिशा दी।
आयोजित प्रमुख प्रतियोगिताएँ —
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निबंध लेखन प्रतियोगिता
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भाषण प्रतियोगिता
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चित्रकला प्रदर्शन
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जनजातीय संस्कृति आधारित क्विज
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रंगोली प्रतियोगिता
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मेंहदी कला
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आदिवासी लोकगीत प्रस्तुति
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जनजातीय लोकनृत्य (गोंड व माड़िया संस्कृति पर आधारित)
इन प्रतियोगिताओं में जनजातीय संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
बच्चों, विशेषकर जनजातीय विद्यार्थियों ने अपनी संस्कृति को मंच पर प्रस्तुत कर आयोजन को यादगार बना दिया।
⭐ विशेष आकर्षण: जनजातीय लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम का सबसे विशेष हिस्सा रहा जनजातीय लोकनृत्य, जिसमें छात्रों ने गोंड और माड़िया जनजातीय वेशभूषा धारण कर नृत्य प्रस्तुत किया।
ढोल, मांदर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ताल पर छात्रों की प्रस्तुति ने पूरे सभागार का माहौल प्रफुल्लित कर दिया।
इसके अलावा—
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विद्यार्थियों ने बिरसा मुण्डा के जीवन पर आधारित लघु नाटक प्रस्तुत किया
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राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने जनजातीय इतिहास पर विशेष प्रदर्शनी लगाई
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चित्रकला विभाग ने बिरसा मुण्डा की जीवनगाथा को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया
⭐ मंच संचालन एवं आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का संचालन अत्यंत कुशलतापूर्वक डॉ. कामाक्षा बिसेन द्वारा किया गया।
आभार प्रदर्शन स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के प्रभारी श्री नरेश सौलखे ने किया।
उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी विभागों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
⭐ कार्यक्रम की सफलता में सबका सराहनीय योगदान
इस पूरे आयोजन में महाविद्यालय परिवार का सहयोग उल्लेखनीय रहा, जिसमें—
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NSS स्वयंसेवक
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भारतीय ज्ञान परंपरा इकाई
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कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ
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परीक्षा नियंत्रण कक्ष
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सांस्कृतिक विभाग
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और सभी छात्र-छात्राएँ
का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में जनजातीय नायकों के प्रति सम्मान, जागरूकता और सांस्कृतिक गर्व को गहराई से स्थापित किया।


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